HI/760212 प्रवचन - श्रील प्रभुपाद मायापुर में अपनी अमृतवाणी व्यक्त करते हैं: Difference between revisions

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{{Audiobox_NDrops|HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी|<mp3player>https://s3.amazonaws.com/vanipedia/Nectar+Drops/760212SB-MAYAPUR_ND_01.mp3</mp3player>|"घर वापस जाना, देवभूमि वापस जाना इतना आसान है। यह बहुत मुश्किल कार्य नहीं है। अगर आप कुछ नहीं कर सकते हैं-अगर आप किताबें नहीं पढ़ सकते हैं, अगर आप तत्त्वज्ञान नहीं समझ सकते हैं, अगर आपका व्यवहार स्तर पर नहीं है-फिर भी, यदि आप देवता के सामने केवल दण्डवत प्रणाम करते हैं, तो आप प्रगति करते हैं। आप प्रगति करते हैं, निस्संदेह।"|Vanisource:760212 - Lecture SB 07.09.05 - Mayapur|760212 - प्रवचन श्री.भा. ०७.०९.०५ - मायापुर}}
{{Audiobox_NDrops|HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी|<mp3player>https://s3.amazonaws.com/vanipedia/Nectar+Drops/760212SB-MAYAPUR_ND_01.mp3</mp3player>|"घर वापस जाना, देवभूमि वापस जाना इतना आसान है। यह बहुत मुश्किल कार्य नहीं है। अगर आप कुछ नहीं कर सकते हैं-अगर आप किताबें नहीं पढ़ सकते हैं, अगर आप तत्त्वज्ञान नहीं समझ सकते हैं, अगर आपका व्यवहार स्तर पर नहीं है-फिर भी, यदि आप भगवान के सामने केवल दण्डवत प्रणाम करते हैं, तो आप प्रगति करते हैं। आप प्रगति करते हैं, निस्संदेह।"|Vanisource:760212 - Lecture SB 07.09.05 - Mayapur|760212 - प्रवचन श्री.भा. ०७.०९.०५ - मायापुर}}

Latest revision as of 06:21, 9 March 2023

HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी
"घर वापस जाना, देवभूमि वापस जाना इतना आसान है। यह बहुत मुश्किल कार्य नहीं है। अगर आप कुछ नहीं कर सकते हैं-अगर आप किताबें नहीं पढ़ सकते हैं, अगर आप तत्त्वज्ञान नहीं समझ सकते हैं, अगर आपका व्यवहार स्तर पर नहीं है-फिर भी, यदि आप भगवान के सामने केवल दण्डवत प्रणाम करते हैं, तो आप प्रगति करते हैं। आप प्रगति करते हैं, निस्संदेह।"
760212 - प्रवचन श्री.भा. ०७.०९.०५ - मायापुर