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HI/670313b प्रवचन - श्रील प्रभुपाद सैन फ्रांसिस्को में अपनी अमृतवाणी व्यक्त करते हैं

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HI/Hindi - श्रील प्रभुपाद की अमृत वाणी
इसलिए यदि आप केवल इस चेतना में रहते हैं कि "मैं ईश्वर का एक शाश्वत सेवक हूँ, और मेरा काम ईश्वर की सेवा करना है ..." और कृष्ण, या ईश्वर से सम्बंधित सेवा दूसरी प्रकार की सेवा हैं। जैसे हम यह सेवा दे रहे है, हम कृष्ण भावनामृत का प्रचार कर रहे है, क्यों? यह हमारा व्यवसाय नहीं है। लेकिन क्योंकि हमने भगवन के साथ अपना सम्बन्ध स्थापित कर लिया है, हम उसका प्रचार करना चाहते है। अतेव कृष्ण भावनामृत का यह अर्थ नहीं है की हम भौतिक जगत से हट कर रहे, पर उसके कार्य अलग होते है। वह ऐसा कर्म नहीं कर रहा जो चिंताजनक है। वह ऐसा कर्म नहीं कर रहा जो चिंताजनक है।यहाँ हम कृष्ण भावनामृत का प्रचार कर रहे। हाँ, ये कोई व्यवसाय नहीं। हम आपसे कुछ भी अपेक्षा नहीं करते हैं। लेकिन अगर आप इसे स्वीकार करते हैं, तो हमारा मिशन अच्छा है। यदि आप इसे स्वीकार नहीं करते हैं, तो भी कोई चिंता नहीं है।
670313 - प्रवचन श्री.भा. ०७. ०७. २५ - २८ - सैन फ्रांसिस्को